दिल्ली में आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल को अंतिम समय तक यह लगता रहा कि कांग्रेस दिल्ली की 7 लोकसभा सीटों पर उनकी पार्टी से गठबंधन करेगी. लेकिन दिल्ली कांग्रेस की प्रमुख शीला दीक्षित ने यह साफ कर दिया कि उनकी पार्टी अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी. इससे को नाउम्मीदी हाथ लगी और अरविंद केजरीवाल तभी से कांग्रेस को कोस रहे हैं और उस पर आरोप लगा रहे हैं कि वह बीजेपी को जिताना चाहती है. केजरीवाल की तरह ही प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव को भी निराशा हाथ लगी है. उन्होंने भी गठबंधन में नहीं होने पर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है.
शिवपाल यादव ने बयान जारी कर अपनी नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि हमने कांग्रेस का एक महीने तक इंतजार किया. कांग्रेस के नेता रोज मीटिंग करते रहे, लेकिन बीच में सूची जारी कर दी. कांग्रेसी नेता भी झूठे लोग हैं.
हाल ही में कांग्रेस के साथ गठबंधन के सवाल पर शिवपाल यादव ने कहा था, 'हम दूसरे अन्य धर्मनिरपेक्ष दलों के साथ मिलकर गठबंधन बनाने जा रहे हैं. हम सेकुलर पार्टियों से गठबंधन को तैयार हैं. उसमें एक कांग्रेस भी है. अगर कांग्रेस हमसे गठबंधन के लिए संपर्क करेगी तो हम बिल्कुल तैयार हैं.' शिवपाल ने कांग्रेस से गठबंधन के सवाल पर कहा था कि कांग्रेस भी एक सेक्युलर पार्टी है और अगर वह बीजेपी को हराने के लिए हमसे संपर्क करती है तो हम उसका समर्थन करेंगे.
शिवपाल यादव ने सपा-बसपा गठबंधन को ठगबंधन करार दिया था. उन्होंने कहा कि यह ठगबंधन है और पैसे के लिए किया गया है. वहीं, कांग्रेस के यूपी प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि यूपी में कांग्रेस के साथ कोई भी सेकुलर पार्टी आती है, जिसका मकसद बीजेपी को हराना है तो हम उसका स्वागत करेंगे. लेकिन लगता है कि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन मूर्त रूप नहीं ले पाया है. शायद इसीलिए शिवपाल भी अरविंद केजरीवाल की तरह अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं.
फिलहाल, अरविंद केजरीवाल को अब भी कांग्रेस से गठबंधन की उम्मीद बनी हुई है. उन्होंने 13 मार्च को ट्वीट कर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से अपील की कि हरियाणा में कांग्रेस गठबंधन करने पर विचार करे. उन्होंने लिखा, 'देश के लोग अमित शाह और मोदी जी की जोड़ी को हराना चाहते हैं. अगर हरियाणा में JJP, AAP और कांग्रेस साथ लड़ते हैं तो हरियाणा की 10 सीटों पर बीजेपी हारेगी. राहुल गांधी जी इस पर विचार करें.'
भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी का एक 27 साल पुराना वीडियो जारी किया है. इस वीडियो में नरेंद्र मोदी श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने जा रहे हैं. इस वीडियो में नरेंद्र मोदी जोशीला भाषण देते नजर आ रहे हैं. इस वीडियो को अपने आधिकारिक ट्वीटर अकाउंट से ट्वीट करते हुए बीजेपी ने लिखा है, "शेरों के तेवर नहीं बदलते."
ये साल था 1992. जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद नया-नया पैर पसार ही रहा था. नरेंद्र मोदी उस वक्त बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी की इस टीम के सदस्य थे, जो जबरदस्त आतंक के दौर में श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने जा रही थी. आतंकियों ने बीजेपी नेताओं के इस आह्वान का विरोध किया था और श्रीनगर आने पर हमले की धमकी दी थी.
दरअसल बीजेपी ने कन्याकुमारी से एकता यात्रा शुरू करते हुए 26 जनवरी 1992 में श्रीनगर के दिल लाल चौक पर तिरंगा फहराने का ऐलान किया था. बीजेपी द्वारा जारी ये वीडियो 24 जनवरी 1992 का है. इस वीडियो में भगवा पगड़ी पहने नरेंद्र मोदी कह रहे हैं, "हमारी यात्रा की सफलता ने आतंकियों को परेशान कर रखा है. लाल चौक में पोस्टर्स लगाए हैं, दीवारों पर लिखा है जिन्होंने अपनी मां का दूध पीया है वो श्रीनगर के लाल चौक आएं, आकर भारत का तिरंगा झंडा फहराएं और अगर वो जिंदा वापस जाएगा तो आतंकवादी उसे इनाम देंगे...आतंकवादी कान खोलकर सुन लें, 26 जनवरी को परसों...अब चंद घंटे बाकी हैं...लाल चौक में फैसला हो जाएगा किसने अपनी मां का दूध पीया है."
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